18 Puranas Namavali(१८ पुराणों की नामावलि एवं दान माहात्म्य)

ऋषियों ने कहा – सूत जी ! आप क्रमशः पुराणों की संख्या तथा उनके दान और धर्म की सम्पूर्ण विधि का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिये।
सूतजी कहते हैं- ऋषियों ! ऐसे ही प्रश्नके उत्तर मे पुराणपुरुष विश्वात्मा मत्स्य भगवान् ने मनु के प्रति पुराणों के विषय में जो कुछ कहा था, उसे भक्तिपूर्वक सुनिये।

प्रथमपुराण ‘ब्रह्मपुराण’- पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने महर्षि मरीचिके प्रति जितने श्लोकों का वर्णन किया था, वह ‘ब्रह्मपुराण’ कहा जाता है। उसमें तेरह हजार श्लोक हैं। जो मनुष्य इस पुराण को लिखकर उस पुस्तक को जलधेनु  (दान के  लिये जल के घड़े में कल्पित गौ) के साथ वैशाख की पूर्णिमा तिथि के दिन ब्राह्मण को दान करता है, वह ब्रह्मलोक मे पूजित होता है।

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Posted on September 1, 2014, in Mantra Sadhana and tagged , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , . Bookmark the permalink. Leave a comment.

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